श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 महत्व, पूजा विधि

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दोस्तो, सावन का महीना हिंदू आस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भगवान शिव के इस प्रिय महीने में कई त्योहार आते हैं जैसे कि मंगला गौरी व्रत, तीज इत्यादि। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण त्योहार है श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023। सावन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को ये व्रत रखा जाता है। इस हिसाब से इस साल श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 08 अगस्त के दिन पड़ेगा। संयोगवश इस बार ये व्रत सोमवार को रखा जाएगा। दोस्तों, पुत्रदा एकादशी निः संतान दंपत्तियों के लिए विशेष महत्व रखती है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और साथ ही संतान की भी प्राप्ति होती है। तो आइए पाठकों आपको श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 के बारे में विस्तार से बताते हैं।

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 

दोस्तो, श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 8 अगस्त को पड़ रही है। इस दिन एकादशी का समापन रात के 9 बजे तक होगा। हिंदू पंचांग के हिसाब से इस तिथि को शुक्ल पक्ष की एकादशी प्रारंभ हो रही है। साथ ही इस दिन सोमवार भी है तो व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस व्रत को निर्जल या जल पी कर या फलाहार कर के भी किया जा सकता है। साथ ही इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

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पुत्रदा एकादशी व्रत विधि

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 के दिन आप इस प्रकार पूजा अर्चना कर सकते हैं:

इस दिन आप सुबह उठकर नहा लें। 

फिर स्वच्छ वस्त्र पहन कर मंदिर की सफाई करें।

वहां भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटो के आगे धूप आदि जलाएं।

फिर व्रत का संकल्प लें।

भगवान विष्णु को फल और नैवेद्य का भोग लगाएं। पूजा में तुलसी दल का प्रयोग ज़रूर करें।

श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करें।

पूजा के बाद आरती करें।

इस दिन आप अन्न ग्रहण न करें।

ब्राह्मणों को अन्न दान करें।

संध्या में भजन कीर्तन करें।

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

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श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 की व्रत कथा इस प्रकार है:

द्वापर युग में महिजीत नामक एक राजन था। उसकी कोई संतान नहीं थी। उसने पुत्र प्राप्ति के लिए अनेकों उपाय किए परंतु कोई परिणाम नहीं निकला। जब उम्र बढ़ने लगी तो राजन ने जनप्रतिनिधियों को बुला कर अपनी व्यथा कही। ऐसा सुन कर ऋषियों से मिलने जनप्रतिनिधि वन को गए। उन्होंने वन में एक आश्रम में लोमेश मुनि को देखा। उन्हें प्रणाम कर जनप्रतिनिधियों ने अपने राजन के कष्ट का कारण पूछा। ऐसा सुन कर लोमेश ऋषि ने राजन के पूर्व जन्म का वृतांत सुनाया। राजा पिछले जन्म में एक पापी वैश्य था। उसने ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को एक ब्याही गाय को जल पीने से हटा दिया था और स्वयं जल पीने लगा था। चूंकि वो एकादशी के दिन भूखा था इसलिए वो अगले जन्म में राजा बना। पर गाय को पानी पीने से रोकने के चलते इस जन्म में उसे इस जन्म में पुत्र वियोग हुआ। 

ऐसा सुन कर सभी लोग ऋषि से राजा के पाप का प्रायश्चित पूछने लगे। ऐसे पूछने पर उन्होंने राज्य की प्रजा को श्रावण शुक्ल पक्ष पर पड़ने वाली एकादशी पर व्रत करने और रात्रि में जागरण करने का उपाय सुझाया। ऐसा करने पर रानी ने गर्भ धारण किया और राजा पाप मुक्त हो गया। आगे चल कर राजन को एक तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का समय

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 की उदय तिथि समय सोमवार, 08 अगस्त को रात 9 बजे तक होगा। इसके अगले दिन मंगलवार को व्रत का पारण होगा। पारण समय प्रातः काल 5 बजकर 47 मिनट से ले कर 8 बजकर 26 मिनट के बीच करना अच्छा रहेगा।

पुत्रदा एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए

पुत्रदा एकादशी के दिन निम्नलिखित खाद्य पदार्थो का सेवन किया जा सकता है:

इस दिन आप दूध का सेवन कर सकते हैं।

एकादशी व्रत में सेंधा नमक, आलू, कुट्टू आदि का प्रयोग भी किया जा सकता है।

इस व्रत में आप अमृत फल जैसे कि आम, केला, अंगूर आदि का सेवन कर सकते हैं।

व्रत में सात्विक भोजन का सेवन ही करें।

मांस मदिरा आदि से दूर रहें।

शलगम, गाजर, पालक आदि को ग्रहण न करें।

आप जो भी भोजन ग्रहण करें वो भगवान को भोग लगा कर और तुलसी दल डाल कर लें।

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श्रावण पुत्रदा एकादशी पारण

 श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 के पारण का दिन 9 अगस्त को है। इस दिन मंगलवार है। व्रत खोलने का उत्तम समय प्रातः काल 5 बजकर 47 मिनट से ले कर 8 बजकर 26 मिनट के बीच है।

दोस्तो उम्मीद है आपको श्रावण पुत्रदा एकादशी 2023 से सम्बन्धित जानकारियां उपयोगी लगी होंगी। हमने आम जानकारियों और इंटरनेट की मदद से इस लेख को लिखा है। आप व्रत रखने से पहले एक बार किसी जानकार से परामर्श अवश्य ले लें।

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